Sunday, October 28, 2012

कुछ और मेरी कलम से …



जिंदगी के हर पन्ने पर एक फ़साना लिखा है ।
कहीं दो आंसू तो कहीं मुस्कुराना लिखा है ।
हर पल को सजा लो अपनी यादों में,
आज आना तो कल जाना लिखा है ।
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मय को मैं कभी हाथ नहीं लगाता ,
और ना ही मैं कभी झूटी कसमें खाता हूँ।
मैख़ाने से बच के निकलता ,
और उनकी आँखों में डूब जाता हूँ।
(Inspired from Gulam Ali's ghazal.)
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मेरी मर्दानगी को तुम यों मत ललकारो ,
गहरे समुन्दर में भी तूफ़ान आता है।
चट्टानों से टकराने में ख़ाक मज़ा है ?
मज़ा तो पर्वतों को ललकारने में आता है।
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तुम्हारी ख़ूबसूरती का वर्णन करने की सोच रहा हूँ मैं।
तुम पर एक कविता लिखने कि सोच रहा हूँ मैं।
बहुत सोचने - विचरने के बाद मुझे ये समझ आया ,
चांदनी को तारों कि रोशनी से मुकम्मल करने कि सोच रहा हूँ मैं।
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