ग़ालिब -The Legend
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ये न थी हमारी किस्मत कि विसाले - यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतज़ार होता।
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कितने शीरीं हैं तेरे लब कि रकीब
गालियाँ खाके बेमज़ा न हुआ।
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इश्क से तबीयत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया
दर्द की दवा पाई, दर्द- बे - दवा पाया ।
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आगे आती थी हाल -ऐ - दिल पर हँसी
अब किसी बात पर नही आती ।
हम हैं वहाँ, जहाँ से हमको भी
कुछ हमारी ख़बर नहीं आती ।
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हमको उनसे वफ़ा की उम्मीद है
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है ।
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जान तुम पर निसार करता हूँ
मैं नहीं जानता दुआ क्या है ।
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Monday, June 15, 2009
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